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10 HASYA RANG NATAK / 10 हास्य रंग नाटक KARYAKRAMON ME CHAR CHAND LAGANE WALE BEHTAREEN RANG NATAK

Author Name: Dr. Kumar Sanjay | Format: Paperback | Genre : Others | Other Details

हिंदी में हास्य नाटकों की बहुत कमी है। कुछ पुराने नाटक हैं जो आज के संदर्भ में सही नहीं बैठते और इधर के नाटकों का स्तर बहुत संतोषजनक नहीं है। इस कमी को पूरा करेंगे डाॅ.कुमार संजय के ये दस हास्य नाटक। सभी नाटक पूर्व मंचित हैं और दर्शकों की वाह-वाही लूट चुके हैं। स्कूल तथा काॅलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ये नाटक चार चांद लगा देंगे। सभी नाटक आज की स्थिति को बयां करते हैं। हम भारतीयों का एक फेवरिट लाइन होता है-जानता नहीं मैं कौन हूं। बंदा भले ही कितना फटीचर क्यों न हो लेकिन दूसरों पर धौंस जमाने के लिए इस वाक्य का प्रयोग करने से नहीं चूकता। ‘जानता नहीं मैं कौन हूं’-इसी शीर्षक से एक नाटक है इस संकलन में। पढ़ेंगे तो आप हंसते-हंसते लोटपोट हो जाएंगे और मंचित करेंगे तो दर्शक। इसी तरह ‘ब्यूटीपार्लर’, ‘आज की हैप्पी फैमली’, ‘माॅडर्न इंटरव्यू’, ‘सेल्सगर्ल’, ‘हाय ये लड़कियां’ ऐसे नाटक हैं जो आपको गुदगुदाएंगे, हंसाएंगे और सोचने पर मजबूर भी करेंगे। इन नाटकों को पढ़िए, इनका मंचन कीजिए, खुद आनंद उठाइए और दूसरों को भी आनंदित कीजिए।  

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डाॅ. कुमार संजय

डाॅ. कुमार संजय हिंदी नाटक लेखन के एक सशक्त हस्क्षाक्षर हैं। आप हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में नाटक लिखते हैं। अबतक आप लगभग सौ नाटक लिख चुके हैं। आपकी 18 नाट्य पुस्तकंे प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘10 हास्य रंग नाटक’ उनकी 19वीं नाट्य पुस्तक है। 2011 में आपको मोहन राकेश सम्मान से विभूषित करते हुए साहित्य कला परिषद, नई दिल्ली ने टिप्पणी की थी -‘कुमार संजय एक ऐसे रचनाकार हैं जिन्होंने भाषा की व्यंजना को अपनी रचना में महत्व दिया है। व्यंग्यात्मक, चुटीली, रसीली भाषा दर्शक से सीधा संवाद करने में कहीं अधिक कारगर होती है। पहली नजर मंे उनके विषय हल्के लग सकते हैं पर धीरे-धीरे उनकी परतें खुलती हैं तो बड़ी ही सरल-व्यंग्यात्मक भाषा में एक गंभीर विषय दर्शकों के सामने होता है। यही कुमार संजय की रचनात्मक विशिष्टता है।’

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