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Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palकिसी भी सांस्कृतिक/शैक्षणिक कार्यक्रम में एक बड़ी समस्या आती है, दो आइटमों के बीच का खाली समय। एक कार्यक्रम की समाप्ति के बाद कई बार दस-दस मिनट का अंतराल आ जाता है, खासकर जब पर्दे के पीछे पुरस्कार वितरण की तैयारी चल रही हो या कोई बड़ा ग्रुप कोई कार्यक्रम परफार्म करने वाला हो। इसी समस्या को दूर करने के लिए ये लघु नाटक लिखे गए हैं। ये नाटक पांच से पंद्रह मिनट के हैं और आसानी से प्रदर्शित करने लायक हैं।
इस पुस्तक में सभी तरह के लघु नाटक संकलित हंै-शिक्षाप्रद, हास्य, रहस्य-रोमांच, नैतिक..। मकसद है, आप आवश्यकतानुसार सही नाटकों का चयन कर सकें और दो कार्यक्रमों के बीच फीलर के रूप में सही ढंग से प्रयोग कर सकें। कुछ कहानियां नेट से ली गई हैं, कुछ पुस्तकों से हैं और कुछ मेरी खुद की हैं।
डाॅ. कुमार संजय
डाॅ. कुमार संजय हिंदी नाटक लेखन के एक सशक्त हस्क्षाक्षर हैं। आप हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में नाटक लिखते हैं। अबतक आप लगभग सौ नाटक लिख चुके हैं। आपकी 20 नाट्य पुस्तकंे प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘15 लघु नाटक’ उनकी 21वीं नाट्य पुस्तक है। 2011 में आपको मोहन राकेश सम्मान से विभूषित करते हुए साहित्य कला परिषद, नई दिल्ली ने टिप्पणी की थी -‘कुमार संजय एक ऐसे रचनाकार हैं जिन्होंने भाषा की व्यंजना को अपनी रचना में महत्व दिया है। व्यंग्यात्मक, चुटीली, रसीली भाषा दर्शक से सीधा संवाद करने में कहीं अधिक कारगर होती है। पहली नजर मंे उनके विषय हल्के लग सकते हैं पर धीरे-धीरे उनकी परतें खुलती हैं तो बड़ी ही सरल-व्यंग्यात्मक भाषा में एक गंभीर विषय दर्शकों के सामने होता है। यही कुमार संजय की रचनात्मक विशिष्टता है।’
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