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Ankaha Kaha / अनकहा कहा

Author Name: Vishakha Mulmuley | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

यह कविता-संग्रह दो भागों से मिलकर बना है  – संभाषण व रूपांतरण। संभाषण में कविताओं के भाव श्रीकृष्ण से संवाद स्वरूप हैं, जो प्रेम, दर्शन, भक्ति व समसामयिक सन्दर्भों से संबंधित हैं। रूपांतरण में मुख्यतः ये प्रेम की उपस्थिति से मनुष्य में आए परिवर्तनों के इर्द-गिर्द बुनी गई कविताएँ हैं।

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विशाखा मुलमुले

विशाखा कविताएँ और लेख लिखती हैं। अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं व ब्लॉग्स में इनकी कविताएँ प्रकाशित हैं। मराठी, पंजाबी, नेपाली और अंग्रेज़ी भाषा में इनकी कुछ कविताओं का अनुवाद भी हुआ है। सात साझा संकलनों में कविताएँ प्रकाशित। पहला काव्य संग्रह ‘पानी का पुल’ बोधि प्रकाशन की दीपक अरोड़ा स्मृति पांडुलिपि योजना के अंतर्गत 2021 में प्रकाशित। डॉ. सुलभा कोरे के मार्गदर्शन में सुधीर सक्सेना की कविताओं का मराठी में अनुवाद ‘अजूनही लाल आहे पूर्व’ नाम से प्रकाशित।

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