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Collection of poetry 'Aina' / काव्य संग्रह 'आईना'

Author Name: Pradeep 'panth' | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

मानव का सच्चा साथी वह स्वयं खुद ही होता है। लेकिन अहंकार भाव के वशीभूत होकर वह स्वयं से ही रूबरू नहीं हो पाता। अहंकार भाव से मुक्त होकर जब कभी भी मानव मुक्त हृदय हो एकाग्रचित्त होता है तो उसका स्वयं का मन, चित्त, हृदय ही उसका 'आईना' बन जाता है। यह वह क्षण होता है जब उसको सही और गलत का एहसास होता है। अहंकार भाव से मुक्त हृदय की अवस्था मानव को स्वार्थ सम्बन्धों के संकीर्ण दायरों से बाहर निकलकर शेष सृष्टि के बारे में सोचने, विचारने व सम्बन्ध स्थापित करने को उद्दत करती है। अच्छे विचारों के समावेश से न केवल व्यक्तित्व निखरता है बल्कि समाज को भी नई दिशा मिलती है। प्रदीप 'पांथ' द्वारा प्रस्तुत काव्य संग्रह 'आईना' विभिन्न विषयों पर लिखी गयी कविताओं का एक ऐसा संग्रह है जो पाठकों को समाज में फैली बुराइयों को दूर करने के लिए चिंतन को प्रेरित करेगा।


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प्रदीप 'पांथ'

प्रदीप कुमार तिवारी मूलतः उत्तर प्रदेश प्रान्त के अमेठी जिले की मुसाफिरखाना तहसील निवासी हैं। सुलतानपुर जनपद के कमला नेहरू भौतिक एवं सामाजिक विज्ञान संस्थान से 1998 में भौतिक विज्ञान विषय से विज्ञान- निष्णात ( मास्टर आफ साइंस) की उपाधि प्राप्त कर 2001 रणवीर रणंजय पीजी कालेज अमेठी से बैचलर ऑफ एजुकेशन की उपाधि प्राप्त की। कुछ वर्षों तक पायनियर मांटेसरी स्कूल लखनऊ में भौतिक शास्त्र प्रवक्ता के रूप में कार्य किया। वर्तमान समय में बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में भी बीते एक दशक से सक्रिय हैं। विज्ञान विषय से सदैव नाता रहने के बावजूद हिंदी में प्रदीप 'पांथ' नाम से कविता लेखन का कार्य बखूबी कर रहे हैं।

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