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Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palछात्रों के लिए हिंदी में मंचनीय नाटकों की बहुत कमी है। डाॅ.कुमार संजय के ये पंद्रह नाटक इस कमी को निश्चित रूप से पूरा करेंगे। इस पुस्तक में अलग-अलग शेड्स के 15 छोटे नाटक हैं - हास्य नाटक, प्रेरणादायक नाटक, जागरूकता वाले नाटक, मस्ती वाले नाटक....लेकिन सभी नाटक सकारात्मक हैं, उत्साहवर्धक हैं और मोटिवेशनल मेसेज देते हैं। कुछ कहानियां आपकी पढ़ी हुई होंगी। इन्हें पढ़ने में आप विशेष ध्यान दीजिएगा ताकि आप सीख सकें कि कहानियों का नाट्य रूपान्तर कैसे किया जाता है। नाटक 7 से 15 मिनट के बीच के हैं। बच्चों के नाटक बहुत बड़े नहीं होने चाहिए, भाषा आसान और संवाद छोटे होने चाहिए ताकि उन्हें याद करने में आसानी हो। और हां, नाटक ऐसे होने चाहिए कि उन्हें बिना किसी ताम-झाम के भी मंचित किया जा सके। इन नाटकों में इन सारी बातों का ध्यान रखा गया है। ये नाटक आपको गुदगुदाएंगे, नई सीख देंगे, कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करेंगे।
डाॅ. कुमार संजय
डाॅ. कुमार संजय हिंदी नाटक लेखन के एक सशक्त हस्क्षाक्षर हैं। आप हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में नाटक लिखते हैं। अबतक आप लगभग सौ नाटक लिख चुके हैं। आपकी 19 नाट्य पुस्तकंे प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘हु लू लू और अन्य रंग नाटक’ उनकी 20वीं नाट्य पुस्तक है। सुप्रसिद्ध साहित्यकार और विद्वान श्री ओमप्रकाश मंजुल ने डाॅ.कुमार पर बहुत सटीक टिप्पणी की है-नाटक तो अनेक लोगों ने लिखे हैं, लिख रहे हैं और लिखेंगे पर कुछ नाटककार ऐसे होते हैं जो अपनी विशिष्ट लेखन अदा और कला के कारण भुलाए नहीं जा सकते। इन्हीं में से डाॅ. कुमार संजय हैं जो निस्संदेह इस समय के सर्वश्रेष्ठ नाटककारों में से एक हैं। डाॅ. कुमार के उर्वर मस्तिष्क में असीम कल्पना करने की क्षमता व योग्यता है। वह extempore लेखक हैं। यूं ही किसी चीज को हवा में उछालकर उस पर नाटक लिख देने की उनमें विशेष प्रतिभा है। श्री कुमार संजय की दृष्टि बड़ी पैनी और सूक्ष्म है। उन्हें नाटकों के तकनीकों का सूक्ष्म ज्ञान है। नाटकों में नये प्रयोग करने में उन्हें मजा आता है।
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