प्राकृतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं व्यंग्यात्मक कविताओं की सामयिक रोचक पुस्तक जिसे आप बार बार पढ़ना चाहेंगे।
नवोदित कवि नवनीत कुमार के दूसरे काव्य - संग्रह "केसर के फूल" की खूबसूरत समसामयिक कविताये पढ़ी और चकित रह गयी की नवनीत इतनी गहन भावो और सवेदनायो से लबरेज कविताये भी लिखते ह। क्यूंकि कविताये खाली बैठे का काम नहीं, अपितु ये भावुक और सवेदनशील ह्रदय का "सहज प्रवाह" ह। कवी की दृष्टि, उसके एहसास, उसकी सोच आमजन से हटकर होती ह।
अपने आसपास घट रही घटनाओं को, छोटे बड़े वाक्यों को सृजनशील इंसान बहुत गमंभीरता से देखता है, महसूस करता है और अंतत वे ही उसकी कविता का स्तोत्र बन जाते है और सवेंदना और भावो से लिपटी अभिव्यक्ति कोमल शब्दों में ढलकर पन्नो पर उतर कर कविता का रूप ले लेती है।