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Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palजब हम कभी अकेले बैठे किसी गहरी सोच में डूबे हों,
आस पास की गतिविधियों का भी भान ना हो .. शून्य होकर सोचते हों अपने होने का अस्तित्व और तभी एक सुंदर तितली आकर हमारे हाथों पर बैठ जाये .. क्या महसूस होगा तब? यही ना कि हम महके होंगे किसी पुष्प की भांति जिससे आकर्षित होकर वो तितली हमारे हाथ पर बैठी ..
वो तितली एक कविता है जो प्रकृति हमें सुनती है .. गाहे बगाहे अनायास ही कहीं भी कभी भी ..
'लोबान' भी वैसी ही महक़ है, जो आपको महसूस होगी जब आप इसे पढ़ेंगे। विचारों की तितलियाँ आपके ज़हन में उड़ने लगेंगी और आप स्वयं को महकता हुआ पाएंगे 'लोबान' की तरह।
'लोबान' प्रतीकात्मक रहस्यवादी धारणाओं को पुष्ट करता एक ऐसा कविता संग्रह है जो हमें हमारे विचारों का प्रकति में व्याप्त प्रेम से साक्षात्कार करवाता है।
तो क्या आप बन सकते हैं 'लोबान' सा महकता प्रेम !
शुभ गौरी
एकांतप्रिय स्वभाव भीड़ से अलग रहने वाली और अपनी बात को बेबाकी से कहने वाली
शुभ गौरी का प्रकृति से विशेष लगाव है, प्रकृति से यही लगाव
इनकी कविताओं में भी देखने को मिलता है।
शुभ गौरी की रचनाएँ प्रेम और प्रकृति की रहस्यवादी धारणाओं को आत्मसात किये हुए है।
इनकी कई रचनाएँ पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।
'लोबान' इनका पहला कविता संग्रह है जो श्रृंगार रस की छायावादी धरणाओं को बड़ी ही खूबसूरती से दर्शाता है।
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