नमस्कार मित्रों मैं 'बृजमोहन पालीवाल' अपना एक और नायाब 'एकल संग्रह' लेकर आया हूँ जो कि मैं दुनिया-भर की, तमाम माताओं व उनकी अपार ममता और स्नेह को समर्पित करता हूँ। वैसे तो माँ और उसकी ममता व उससे मिली शिक्षा का एवं संस्कारों को शब्दों के माध्यम से बयाँ कर पाना सरल नहीं है, उसके लिए तो शब्द ही कम पड़ जाएँगे। माँ तो माँ ही होती है, वो तो धरती पर साक्षात भगवान का ही रूप है। माँ तो अतुलनीय है एवं पूजनीय है। मैंने अपने इस 'एकल संग्रह' में अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रत्येक माँओं के बारे में लिखा है, माँ के प्रति अपने सभी विचारों-भावों को व्यक्त करने का प्रयास किया है और उसके अनेक रूपों का भी वर्णन किया है। मेरे इस एकल संग्रह का शीर्षक है 'माँ तेरे रूप अनेक'। आशा करता हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरा ये स्वरचित एकल संग्रह बेहद पसंद आएगा। मित्रों आपका साथ व आपका स्नेह सदैव मेरे साथ बना रहे। धन्यवाद!
✍ बृजमोहन पालीवाल