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MAIN LADKI HOON AUR ANYA MONOLOGUE / मैं लड़की हूँ और अन्य मोनोलाॅग

Author Name: Dr. Kumar Sanjay | Format: Paperback | Genre : Others | Other Details

मोनोलाॅग का अर्थ है एकालाप, अर्थात् एक व्यक्ति/पात्र का संवाद। यह संवाद 30 सेकंेड से 30 मिनट या डेढ़ घंटे तक का हो सकता है। इसमें सिर्फ एक पात्र अकेले कई पात्रों की भूमिका निभाता है। मोनोलाॅग, लेखक, अभिनेता और निर्देशक तीनों के लिए, काफी कठिन और चुनौती-पूर्ण माना जाता है। एक-दो मिनट का संवाद तो क्रिएट किया जा सकता है। यू ट्यूब पर एक-दो मिनट के बहुत से मोनोलाॅग देखे जा सकते हैं। लेकिन सिर्फ मोनोलाॅग के बल पर एक पूरा नाटक खड़ा करना बहुत कठिन तथा श्रमसाध्य काम है और यह काम सिर्फ वही नाटककार कर सकता है, जिसे लेखन के साथ-साथ मंच के टेकनिकल पक्ष का भी ज्ञान हो। फिर बात आती है इसके निर्देशन की। इसे निर्देशित करना भी एक दुःसाघ्य काम है क्यांेकि इसको कनसीव करना हर निर्देशक के वश की बात नहीं। और कलाकार के लिए तो यह अत्यंत चुनौतीपूर्ण काम है। सिर्फ एक कलाकार 5 मिनट से दो घंटे तक अकेले कई पात्रों की भूमिका निभाए और दर्शकों को ऊबने न दे, यह कोई मामूली बात नहीं। मोनोलाॅग के लिए सिद्ध लेखक, कलाकार और अनुभवी निर्देशक अपेक्षित हंै।
इस पुस्तक में सिर्फ संवाद नहीं, मोनोलाॅग पर आधारित नाटक हंै, वह भी एक नहीं, सात।

उम्मीद है, इन नाटकों को पढ़ने और प्रस्तुत करने में आपको काफी आनंद आएगा और आप एक नये रोमांचक अनुभव से होकर गुजरेंगे। चूंकि ये एकल नाटक हैं, इसके लिए बहुत छोटी टीम की जरूरत पड़ेगी। बल्कि बिना किसी टीम के भी इन्हें मंचित किया जा सकता है। अगर अभिनय का जुनून है, तो सोचना क्या, इन्हें पढ़िए, कनसीव कीजिए और शुरू हो जाइए।

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डाॅ. कुमार संजय

डाॅ. कुमार संजय हिंदी नाटक लेखन के एक सशक्त हस्क्षाक्षर हैं। आप हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में नाटक लिखते हैं। अबतक आप लगभग सौ नाटक लिख चुके हैं। आपकी 21 नाट्य पुस्तकंे प्रकाशित हो चुकी हैं। 2011 में आपको मोहन राकेश सम्मान से विभूषित करते हुए साहित्य कला परिषद, नई दिल्ली ने टिप्पणी की थी -‘कुमार संजय एक ऐसे रचनाकार हैं जिन्होंने भाषा की व्यंजना को अपनी रचना में महत्व दिया है। व्यंग्यात्मक, चुटीली, रसीली भाषा दर्शक से सीधा संवाद करने में कहीं अधिक कारगर होती है। पहली नजर मंे उनके विषय हल्के लग सकते हैं पर धीरे-धीरे उनकी परतें खुलती हैं तो बड़ी ही सरल-व्यंग्यात्मक भाषा में एक गंभीर विषय दर्शकों के सामने होता है। यही कुमार संजय की रचनात्मक विशिष्टता है।’

2012 से मई 2020 के बीच आपकी 20 नाट्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैंः 
1. हवा रोको
2. कैंपस प्लेज
3. पांच रंग नाटक
4. मम्मा मुझे बचा लो
5. ये है इंडिया मेरी जान
6. द एंड आॅफ अ लव स्टोरी
7. कुकड़ू-कूं और अन्य रंग नाटक
8. आइला, क्या लड़की है
9. काॅन्ट्रैक्ट मैरिज
10. प्रेमचंद की श्रेष्ठ कहानियों का नाट्य रूपान्तर
11. मगरमच्छ की पूंछ और अन्य रंग नाटक
12. हर एक फ्रेंड जरूरी होता है और अन्य रंग नाटक
13. किडनैपिंग और अन्य रंग नाटक
14. एक करोड़ (2011 में मोहन राकेश सम्मान से विभूषित)
15. ग्यारह विश्वप्रसिद्ध कहानियों के नाट्य रूपान्तर 
16. दो नृत्य नाटक: राम की शक्ति पूजा और कामायनी
17. कैटरीना काफ को बुलाए थे जुन  
18. 10 आॅफ बीट रंग नाटक
19. 10 हास्य रंग नाटक
20. हू लू लू और अन्य रंग नाटक
21.     15 लघु नाटक

यह आपकी 22 वीं नाट्य पुस्तक है. 

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