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Nepathya Mein Goonjte Shabd / नेपथ्य में गूँजते शब्द कविता संग्रह

Author Name: Vijay Kumar Singh | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

नेपथ्य में गूँजते शब्द वृतान्त है मनुष्यता की। मनुष्यता के हर पहलू को समेटे ये 46 कविताएँ, प्रेम एवं सौंदर्य की,संघर्ष एवं समर्पण की, आत्मा एवं वासना की, प्रेरणा एवं ढृढ़ निश्चय की सरल एवं सुन्दर व्याख्या करते हैं । वीर रस के रोर रौरव से लेकर श्रृंगार रस की शीतलता तक सारे भाव इन कविताओं के शब्दों एवं छंदों के माध्यम से मनुष्य के निरंतर संघर्ष एवं अमर प्रेम की गाथा कहते हैं । ये कविताएँ कथा हैं इस नश्वर शरीर की जिसकी अमर चेतना अनादि काल तक नेपथ्य में गूँजती रहती है ।

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विजय कुमार सिंह

विजय  कुमार  सिंह  का  जन्म  1961  में  बिहार  राज्य  के  बेगूसराय  जिले  के  बहदरपुर  ग्राम  में  हुआ । विज्ञान  में  स्नातक  तक  की  शिक्षा  प्राप्त  की । हिंदी  साहित्य,  काव्य,  वैदिक  इतिहास  एवं  दर्शन  में  विशेष  रूचि  रखते  हैं ।

उनकी अन्य प्रकाशित रचनाएँ  "शुनःशेप एवं नचिकेता" ( काव्य संग्रह ) एवं  "कल्याणी" ( काव्य ) हैं ।

शीघ्र प्रकाशित होनेवाली रचना "चित्रलेखा" ( कविता संग्रह ) है ।

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