Hindi

Kaash
By Sadaf bhatt in Poetry | Reads: 85 | Likes: 2
*Kaash ki yh phir se hojaye*  Kaash ki vo waqt phir se kahi mil jaye Kaash ki tere seene pe sir rkh k hum phir se kahi kho jaye Kaash ki mere haatho mei phir vo tera haath ho jaye Kaash ki kuch aisa bss ek baar phir se ho jaye Kaaaaashh ho jaye *Sadafbhatt*  Read More...
Published on Apr 12,2020 12:27 PM
Dost
By arisha shaikh in Poetry | Reads: 108 | Likes: 0
Dosti khuda ki sabse haseen niyamat hai Bina dosto k zindagi ek shikayat hai Khushnaseeb hai woh log jinke paas ye daulat hai... Roye Jo hum toh hasata h dost Ruthe Jo hum toh manata nhi or satata hai dost Lekin  uske alawa sataye Jo koi uski band bajata hai dost Humare tute hue Dil ko fevico  Read More...
Published on Apr 12,2020 02:31 PM
Ishq
By Apoorv Srivastava in Romance | Reads: 92 | Likes: 0
कोई मुस्कुरा के गुज़रा था बगल से, चलो हटो मुझे जाने दो आज फिर उसके पैरों के निशाँ देखता हुँ, मैंने ईश्क को जिंदा दफना  Read More...
Published on Apr 12,2020 02:39 PM
निर्भया
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | Reads: 105 | Likes: 0
       निर्भया के पिता आपसे कुछ कहना चाहते हैं। पूजा मैंने कई देवताओं को,धन-धान्य का दान किया तब जाकर देवी के रू  Read More...
Published on Apr 12,2020 02:43 PM
क्या हुआ?
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | Reads: 104 | Likes: 0
क्या हुआ गर कोई तेरे साथ नहीं? क्या हुआ गर मंज़िल अभी पास नहीं? अकेले हीं निकले थे इस मार्ग पर कठिनाइयों से घबराते हो   Read More...
Published on Apr 12,2020 02:51 PM
हां,वह एक लड़का है
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | Reads: 166 | Likes: 0
हां,वह एक लड़का है ख्वाहिशें तो हैं उसकी भी मगर बताने से वह डरता है समाज ने कहा कठोर बनो कभी ना टूटे वो डोर बनो तुम्ही  Read More...
Published on Apr 12,2020 02:53 PM
रुका नहीं हूं
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | Reads: 97 | Likes: 0
तू पर्वत सा विराट खड़ा मैं अभिमान को तेरे देख डरा देख उठा के सर अपना ले नदी मैं बनकर तेरी ओर बढ़ा खोद सुरंग तेरे गुमा  Read More...
Published on Apr 12,2020 02:59 PM
एक बूढ़ा
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | Reads: 99 | Likes: 0
शीत ऋतु की सर्द रात उस मोड़ पर बैठा एक बूढ़ा अर्धनग्न बदन लगभग सत्तर का वो होगा गमछा,डंडा हैं उसके धन ताकता कभी तारो  Read More...
Published on Apr 12,2020 03:05 PM
सुख की परिभाषा
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | Reads: 101 | Likes: 0
आंनद , सुख क्या है?  जैसे भोर में सुनाई दे पक्षियों की चहचहाहट, जैसे दिसंबर की सर्दी में धूप की गर्माहट, जैसे वसंत ऋत  Read More...
Published on Apr 12,2020 03:09 PM
तुम्हारा तिल
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | Reads: 93 | Likes: 0
मंत्रमुग्ध हो गया हूं तुम्हारी अदाओं पर तुम्हारे हुस्न के,कुछ यूं चर्चे हज़ार हैं जो दूर रहो तो ध्यान भटकाती है, कर  Read More...
Published on Apr 12,2020 03:11 PM
महबूब
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | Reads: 91 | Likes: 0
महबूब वो जो अपनी मनोरम मुस्कान से उसके सारे दुख मिटाए जो भीड़ में चलते हुए अपनी बांह की आड़ बनाए जो तपती दुपहरी में   Read More...
Published on Apr 12,2020 03:14 PM
वो लौटेगी
By Deepak in True Story | Reads: 98 | Likes: 0
बचपन की मोहब्त की बात ही जुदा होती है, उसमे बेखयाली, ज़िद, जूनून हद से ज़्यदा और हवस लेश मात्र भी नहीं होती। यह तबकी बात   Read More...
Published on Apr 12,2020 04:44 PM
मेरी मानो तो यह आराम कर रही।
By Chanchal Palsania in Poetry | Reads: 96 | Likes: 0
मेरी मानो तो यह सड़के आराम कर रही। अवकाश के कुछ पल अपने नाम कर रही। नई-नई गर्मी छुट्टी का आरंभ कर रही। पीपल,नीम,और आम   Read More...
Published on Apr 12,2020 05:34 PM
प्यार
By Amish in True Story | Reads: 146 | Likes: 3
मैं और मेरी तनहाई अक्सर बात किया करते थे कि ना जाने कब कोई ऐसा मिलगे जो हमको समझेगा , जानने की छह रखेगा ???? अक्सर ऐसे प्  Read More...
Published on Apr 12,2020 05:43 PM
।। हम ‘कोरोना’ फतह कर पाएँगे ।।
By Akash Goswami in Poetry | Reads: 82 | Likes: 1
।। हम ‘कोरोना’ फतह कर पाएँगे ।।                                         -- आकाश गोस  Read More...
Published on Apr 12,2020 05:44 PM