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Surendra Kushwaha

Spirituality
Spirituality

Generally, as we know life, we know this world. It is neither this life nor this world because we want something else, and something else happens. If this life and the world were as we know it, then it should have been what we knew and wanted. Life and the world are what we do not know. That is why what happens in life is unknown. We do not know what is there in these sixty-seventy years of life. At birth, we have no name, caste, religion, rites and ego. Then a few days later, our name is Surendra, caste becomes Kushwaha, religion becomes Hindu, rites are performed and this ego palace is builtRead More...

मरघट

Books by सुरेंद्र कुशवाहा

जन्म के बाद मृत्यु निश्चित है और बाकी सब चीजें अनिश्चित है। और जो जीवन में निश्चित है उसे हम न जानकर उसके पीछे दौड़ते रहते हैं जो जीवन में मिल भी सकता है, और नहीं भी मिल सकता है। धन

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जीवन में विपरित का नियम

Books by सुरेंद्र कुशवाहा

मनुष्य जन्म लेने के उपरांत रोता है यह आश्चर्यजनक तथ्य नहीं है, लेकिन मनुष्य रोता हुआ मरता है यह आश्चर्यजनक तथ्य अवश्य है। जन्म के कारण दुःख शुरू होता है रोना स्वभाविक है। लेकिन म

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जन्म और पुनर्जन्म

Books by सुरेंद्र कुशवाहा

हमारे भीतर वह अमृत है जो हमारे शरीर के गिर जाने बाद भी बच जाता है। उसकी खोज करनी चाहिए। वह अमृत जब हम इस शरीर में नहीं थे तब भी था और जब इस शरीर को छोड़ कर चले जाएंगे तब भी रहेगा। जो इ

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