হিন্দি

Waqt
By Keyur Katira in Poetry | পড়ার জন্য : 418 | পছন্দ: 1
वक़्त को थोड़ा वक़्त दो, वक़्त सब संभाल लेगा। आज नहीं तो कल, वो सारे घाव भर देगा। सब मायूसी चली जाएगी, हर मुश्किल घड़ी बीत ज  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 11,2020 02:24 PM
Saachai se samna
By Ashish in Poetry | পড়ার জন্য : 189 | পছন্দ: 0
Jo rang na badle wo inshaan kaisa jo saath na de wo bhagwan kaisa jo tumhe sambhal na de wo mohabaat kaisi jo tumhe akela karde wo bhid kaisi jo waqt waqt pe na bdle wo fit rat kaisi jo kaechhi ki tarah na chale wo zuban kaisi jo zindagi na saawar de wo saath kaisa jo haq bhi na de wo pyaar kaisa&nb  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 11,2020 02:28 PM
Jyada nahi keh sakta uske bareme nahi toh wo aur haseen
By tarun in Poetry | পড়ার জন্য : 642 | পছন্দ: 0
Jab muskuraye wo toh roshni si ho jati hai, jab palkhe jhukaye wo toh barish si ho jati hai.., jyada nahi keh sakta uske bareme nahi toh wo aur haseen ho jati hai… Jab Julfo se khele wo toh mere chehre me muskaan si ajati hai, jab ankho se bole wo toh dil me shanti si ho jati hai…, jya  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 11,2020 04:55 PM
Yaar nhi hai tu mera
By Riddhi in Poetry | পড়ার জন্য : 221 | পছন্দ: 0
Yaar nhi hai tu meri  Tu to aftaab hai Jo shab mai bhi mere liye chand jala deti hai Tu to dhoop hai jo Udasiyon ke badalo ke piche se mushkura deti hai Tu wo mahfeel hai jo Bhid mai mujhe tanha nhi hone deti Tu wo khanak hai jo zindagi ko mere suna nhi hone deti Tu wo diary hai jo Mere saare   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 11,2020 07:08 PM
Good bye mine
By Riddhi in Romance | পড়ার জন্য : 289 | পছন্দ: 0
Dear mine, Pichli dafa mere alfazon mai teri aane ki khushbu thi Iss martaba tere jaane ki dastak hai....... Khamoshi to pure seher me bikhari hui hai Par sannate ka sabse jyada shor mere hi andar hai Din to kaat leti hai hun teri purani yaadon se  Par samjh nhi aata raaton ka kya karu.....&nbs  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 11,2020 07:15 PM
तुम लड़के हो !!
By Vidhi Wadhwa in Poetry | পড়ার জন্য : 468 | পছন্দ: 1
तुम लड़के हो, तो लड़कियो जैसे रो क्यों रहे हो? तुम लड़के हो, तो बाहर जाओ खेलो लड़कियो की तरह खाना क्यों बना रहे हो? तुम   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 11,2020 07:22 PM
समाज का आईना
By Mohit Sharma in General Literary | পড়ার জন্য : 478 | পছন্দ: 3
आज सुबह उठकर लॉकडाउन में भी तैयार होकर में बैंक पहुंचा। अपनी कार पार्क करके मैंने ब्रांच कि तरफ़ कदम बढ़ाए तो देखा   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 11,2020 07:52 PM
Corona se daro na
By nidhi in Poetry | পড়ার জন্য : 561 | পছন্দ: 0
Naukri se Waqt hi nahi milta kehkar jin apno se hue dur Un apno ke sath ab to time spend karo na Monday morning blues ko koste the ab tak Ab ghar bhaitne k us maze ki baat b to karo na Kabhi pet to kabhi sir dard ka bahana bana school se chhutti karate the To ab mili is chhutti ko healthy hokar njoy  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 11,2020 10:19 PM
हम दो हमारे दो
By Purnendu Ghosh in Poetry | পড়ার জন্য : 664 | পছন্দ: 0
हम दो हमारे दो   हम दो हमारे दो हम चार रहते थे एक फुटपाथ पर हर रोज़ डंडा खाकर भी चारो रोज़ लाते थे साथ  खाते थे बचा ख  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 12,2020 12:29 AM
बूढ़ी सोच
By Purnendu Ghosh in Poetry | পড়ার জন্য : 471 | পছন্দ: 0
बूढ़ी सोच   मैंने चाची से पूछा कैसी हो पचासी की है बोली  अच्छी हूं तुम्हारे चाचा के जाने के बाद अकेली हो गई हूं को  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 12,2020 12:31 AM
इरादा
By KI$#@N in General Literary | পড়ার জন্য : 590 | পছন্দ: 0
ख्वाब बहुत से है, और ख्वाब हासिल करने का नशा भी बहुत हैं, ए मंजिल तु कितने भी नखरे दिखा तुझे पाने का जज्‍बा बहुत हैं|   বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 12,2020 10:03 AM
Andaaz...
By OM KADU in Poetry | পড়ার জন্য : 158 | পছন্দ: 0
Yaado me tare guzari mane saari raat hai... Mare dil ke sanduko me teri saari raaj hai... Na kisi ko khe sakhe , na kisiko bol sakhe chup rehna hi mera andaaz haii...  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 12,2020 10:33 AM
Go and wash your hand
By Chanchal palsania in Poetry | পড়ার জন্য : 209 | পছন্দ: 0
*Go And Wash Your Hand* Go and wash your hand, बज जाएगी वरना सबकी बैंड ।   सुना हैं कोरोना फैल रहा है, हाथो ही हाथो खेल रहा है,  हर इंसान इसे झेल  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 12,2020 11:28 AM
दूरियॉ मिटाते हैं ।
By Ajahar Rahaman in Poetry | পড়ার জন্য : 812 | পছন্দ: 0
चल दूरियॉ मिटाते हैं । गुस्ताखियॉ भुलाते हैं । कोई गीत नया गाते हैं । आ तू- आ तू फिर से , सनम मुस्कराते हैं । चल माही फि  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 12,2020 12:00 PM
शाम ढल रही है ।
By Ajahar Rahaman in Poetry | পড়ার জন্য : 986 | পছন্দ: 1
ढल रही है शाम कोई, और ओ गीत गुन गुना रही है । रख के माथे पलू अपना ,ओ दीपक जला रही है । फिर कोई शाम ढ़लती जा रही है ,धीमें- ध  বেশি পড়ুন...
প্রকাশিত হয়েছে Apr 12,2020 12:17 PM