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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Pal‘लीडरशिप’ प्रबंधन एवं मानव संसाधन के क्षेत्र का बहुआयामी शब्द है और हम सब अपनी-अपनी समझ एवं दृष्टिकोण से इसका आशय निकालते हैं। जहाँ लीडरशिप या नेतृत्व गुण हम सबकी प्रगति के लिए अत्यावश्यक है, वहीं हमारी शिक्षण प्रणाली में नेतृत्व गुण को यथोचित महत्व प्राप्त नहीं है। जिस शिक्षा प्रणाली के तहत हम अपनी ज़िंदगी के 15 से 20 मूल्यवान वर्ष व्यतीत करते हैं, वहाँ हम जानकारियाँ तो ग्रहण कर लेते हैं पर नेतृत्व गुण नहीं। शिक्षण पूर्ण करने के पश्चात युवा जब अपनी आजीविका प्रारम्भ करते हैं तो अधिकांश संस्थानों का अधिकतम ज़ोर उनके तकनीकी प्रशिक्षण पर होता है, नेतृत्व क्षमता पर नहीं। लेखक का मानना है कि नेतृत्व गुण सिर्फ कुछ विशिष्ट लोगों के लिए ईश्वर प्रदत्त नहीं है, बल्कि ये तो कभी भी, किसी भी आयु में विकसित किए जा सकते हैं। यूँ तो लीडरशिप विषय पर कई पुस्तकें उपलब्ध हैं पर उनमें लीडर को एक असाधारण नायक के रूप में दर्शाया गया है जो लेखक के विचार से भारतीय युवाओं के समक्ष लीडरशिप के सही मायने नहीं रखता।
मूल रूप से अँग्रेजी में ‘प्रागमेटिक लीडरशिप’ शीर्षक की यह पुस्तक हमें बताती है कि मानव में वह असाधारण प्राकृतिक शक्ति है जिसके बलबूते, वह सीढ़ी-दर-सीढ़ी नेतृत्व गुणों को विकसित कर सकता है। इस पुस्तक में नेतृत्व गुणों को 3 चरणों में, व्यक्तिगत, टीम एवं सांगठनिक स्तर पर विकसित करने की प्रक्रिया सरल एवं सुसंगत भाषा में समझाई गई है। सामान्य पृष्ठभूमि से उभरकर निकले सफल लीडर्स के जीवन प्रसंग पुस्तक को अनुकरणीय बनाते है। पुस्तक को हिन्दी भाषी एवं महत्वाकांक्षी युवाओं तक पहुँचाने के उद्देश्य से श्री श्रीधर गोखले ने इसे हिन्दी में अनूदित किया है।
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Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.एन. सी. नारायणन
श्री एन. सी. नारायणन SSA Group of Companies के संस्थापक अध्यक्ष हैं। SSA एक अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधन सलाहकार कंपनी है, जिसे ट्रांसफ़ौर्मेशन मैनेजमेंट (Transformation Management) एवं संगठनात्मक विकास ऑर्गनाइजेशनल ड़ेवलपमेंट (Organizational Development) के क्षेत्र में महारत हासिल है। उत्पाद एवं सेवाओं की गुणवत्ता में इनकी प्रारम्भ से रुचि रही है और अपने लगभग 5 दशक के व्यावसायिक जीवन में उन्होंने गुणवत्ता को अपना लक्ष्य रखा है। गुणवत्ता से जुड़े अपने अनुभवों को एनसी॰ जी, “मेक इन इंडिया” की भावना के तहत भारत के सभी उद्यमियों के साथ साझा करने में जुटे हैं। इसके साथ ही आप दक्षिण एशिया, मध्य पूर्व देशों एवं अफ्रीका के लगभग 20 देशों के विभिन्न सीईओ एवं लीडरशिप टीम के सदस्यों में सार्थक बदलाव लाने हेतु मार्गदर्शन करते हैं और इसीलिए लोग आपको ट्रांसफ़ौर्मेशन उत्प्रेरक (Transformation catalyst) के रूप में भी जानते हैं।
श्रीधर गोखले मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर से हैं। पेशे से इंजीनियर होने के कारण श्रीधर की दिनचर्या मैनेजमेंट एवं इंजीनियरिग से ंजुड़े तथाकथित शुष्क विषयों से भरी रहती है। ऐसे में अपनी संवेदनाओं और सरोकारों को जीवंत बनाए रखना उल्लेखनीय है। आपकी इस पुस्तक के अनुवादक की भूमिका भीइसका परिचायक है। ‘प्रागमैटिक लीडरशिप’ पुस्तक ने आपको काफी प्रभावित किया। आपने इस पुस्तक को अपनी कंपनी के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया ताकिआपकी टीम के युवाओ को नेततृ्व के पाठ शुरुआत में ही मिल सकें। इसके भी आगे जाकर, हिंदी भाषी युवाओ को भी इस अमूल्य निधि का लाभ हो, इसके लिए आपने स्वत: इसके अनुवाद का बीड़ा उठाया।
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