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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palस्वतंत्रता के बाद से वर्तमान तक लोकसभा चुनाव और राज्य विधानसभाओं के उत्तरोत्तर चुनाव इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत के लोगों में संसदीय शासन प्रणाली के प्रति निष्ठा कायम है। लोकतंत्र का अभिप्राय एक ऐसी शासन प्रणाली से है जिसमें शासन की शक्ति जनता के हाथ में होती है जिसका संचालन वह स्वयं या अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से करती है। संसदीय शासन से अभिप्राय उस शासन पद्धति से है जिनमें प्रधानमंत्री व मंत्रीपरिषद अर्थात वास्तविक कार्यपालिका अपने कार्यों के लिए व्यवस्थापिका के प्रति उत्तरदायी होती है। सरकार के तीनों अंगो में व्यवस्थापिका सबसे महत्वपूर्ण अंग होती है व्यवस्थापिका एक सदनात्मक अथवा द्विसदनात्मक हो सकती है। एक सदनीय व्यवस्थापिका में व्यवस्थापिका का एक सदन होता है जो यूनान बुलगारिया आदि देशों में पायी जाती है। जबकि जिन राज्यों की व्यवस्थापिका में दो सदन होते हैं उसे द्विसदनात्मक व्यवस्थापिका कहते है। द्विसदनात्मक व्यवस्थापिका प्रजातांत्रिक शासन के अनुकूल भी है और निरंकुशता पर अंकुश लगाने के अलावा सभी विशिष्ट वर्गों का प्रतिनिधित्व भी करती है। अतः इसे एक सदनात्मक व्यवस्थापिका से अच्छा माना जाता है। भारत में द्विसदनात्मक व्यवस्थापिका को अपनाया गया जिसमें उच्च सदन को राज्यसभा और निम्न सदन को लोकसभा के नाम से जाना जाता है। यह व्यवस्था ब्रिटिश संवैधानिक विकास पर परिणाम है। वर्तमान में सभी बड़े लोकतांत्रिक राज्यों में द्विसदनात्मक व्यवस्थापिका पायी जाती है। इंग्लैण्ड, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्जरलैण्ड और भारत सहित द्विसदनात्मक व्यवस्थापिका वाले राष्ट्र है।
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डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर (मध्यप्रदेश) से एम ए राजनीति विज्ञान विषय में (2008 प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण) इसी विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रकाशन विभाग से "संसदीय लोकतंत्र में व्यवस्थापिका की भूमिका राज्यसभा के विशेष संदर्भ में 1996 से वर्तमान तक।विषय से 2013में डॉ.ऑफ फिलॉसफी (पी-एच.डी.) की उपाधि प्राप्त की। आपने कई वर्षों तक विभिन्न संस्थाओं में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का अध्यापन कार्य किया है।
आपके शोध-पत्र अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आपने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठियों में भी सहभागिता की है।
सम्प्रति : शासकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्ययालय देवरी सागर जिला सागर के राजनीति विज्ञान विभाग में कार्यरत् हैं ।
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