सहज राजयोग: डिजिटल युग की जकड़न से अनंत शांति की ओर
क्या आपकी सफलता की कीमत आपका शरीर और मन चुका रहा है?
आज के दौर में, जहाँ हम 'कुर्सी' और 'स्क्रीन' के बीच कैद हैं, केवल शारीरिक व्यायाम पर्याप्त नहीं है। जिम और अन्य व्यायाम पद्धतियाँ जहाँ शरीर में 'रजोगुण' और चंचलता बढ़ाती हैं, वहीं योग एकमात्र ऐसा विज्ञान है जो शरीर को स्वस्थ, मन को शांत और आत्मा को तृप्त करता है।
'सहज राजयोग : योग-साधना-परिचय' आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों और प्राचीन भारतीय दर्शन का एक अद्भुत संगम है।
यह पुस्तक क्यों पढ़ें? एक कॉर्पोरेट प्रोफेशनल के निजी अनुभवों से निकली यह पुस्तक आपको सिखाती है कि:
सर्वांगीण स्वास्थ्य: कैसे लेखक ने 'फैटी लिवर' और 'मधुमेह' जैसी जीवनशैली-जनित बीमारियों को बिना भारी दवाओं के हराया।
चित्त की शांति: महर्षि पतंजलि के सूत्र "योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः" के अनुसार, मन में उठने वाले विचारों के भंवर को कैसे रोकें।
व्यावहारिक प्रयोग: ऑफिस की कुर्सी पर बैठे-बैठे (Desk Yoga) शरीर को लचीला रखने और 'डिजिटल थकान' मिटाने के अचूक उपाय।
आत्मा से परमात्मा: योग का वास्तविक अर्थ 'जोड़ना' है। जानें कि कैसे अपनी आत्मा को परमात्मा की शक्ति से जोड़कर आप असीम ऊर्जा पा सकते हैं।
यह किसके लिए है? यह पुस्तक स्त्री-पुरुष, बालक, युवा एवं वृद्ध—सभी के लिए सुगम और उपादेय है। चाहे आप एक व्यस्त प्रोफेशनल हों, एक विद्यार्थी हों या शांति की तलाश में जुटे साधक, 'सहज राजयोग' आपकी यात्रा का पहला पड़ाव है।
अपनी श्वासों को साधें, मन को जीतें और एक 'राजयोगी' बनें।