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Ek Indradhanush Shatrangi / एक इंद्रधनुष शतरंगी सौ रंग, सौ कविताओं में / Sau Rang, Sau Kavitaon Mein

Author Name: Shubh Chintan | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

सौ कविताओं का ये संकलन एक इंद्रधनुष की तरह

है पर सप्तरंगी नहीं शतरंगी। इन कविताओं में प्रेम,

विद्रोह , रोष, माँ, बेटी, पिता, बेचैनी, उदासीनता,

देशभक्ति , निराशा, साँस, कली, चाँद जैसे सौ विचारों

(रंग) को एक सूत्र में पिरोया गया है।

शेर दर शेर जुड़ गए तो ग़ज़ल,

ख़ाली रास्ते पे कारवाँ हो गई

शायरी छितरी छितरी बरखा सी,

कुछ यहाँ और कुछ वहाँ हो गई

...............

इत्र काग़ज़ पे छिड़क कर गुलाब मत होना

सिर्फ़ गंगा में नहाकर सवाब मत होना

शाम आए और तेरी ढलने की मजबूरी हो

तो फिर मेरी सहर में आफ़ताब मत होना

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शुभ चिंतन

लेखक भारतीय राजस्व सेवा (IRS, 1993 Batch) के अधिकारी हैं एवं वर्तमान में आयुक्त(GST), गुरुग्राम के पद पर कार्यरत हैं। लेखक की शिक्षा कक्षा बारहवीं तक हिंदी माध्यम से ज़िला अलीगढ़ में हुई और तत्पश्चात इंजीनियरिंग की डिग्री उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से प्राप्त कीl लेखक को उनकी असाधारण कर्तव्यनिष्ठा एवं विशिष्ट सेवाओं के लिये गणतंत्र दिवस 2014 के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जा चुका है। लेखक को सीमा शुल्क प्रशासन में उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिये विश्व सीमा शुल्क संगठन के महासचिव द्वारा भी प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जा चुका है।

लेखक का यह पाँचवाँ कविता संग्रह है। इससे पहले उनके चार संग्रह, ‘ओट से मन दिखता है', ‘मटकिया भरी नहीं', ‘मिसरा मिसरा ग़ज़ल आशिक़ाना हुई' तथा ‘संवाद राम और कान्हा से' प्रकाशित हो चुके हैं।

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