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Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palश्रीशंकरानन्द कृत ईशावास्य दीपिका -
ईशोपनिषद् शुक्ल यजुर्वेदीय शाखा के अन्तर्गत उपनिषद है। प्रमुख् दश उपनिषदों में यह उपनिषद् , अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। इसमें मात्र १८ मन्त्र हैं । इसमें कोई कथा-कहानी नहीं है, केवल आत्म वर्णन है। इस उपनिषद् के पहले मंत्र ‘‘ईशावास्यमिदंसर्वंयत्किंच जगत्यां-जगत…’’ से लेकर अठारहवें मंत्र ‘‘अग्ने नय सुपथा राये अस्मान् विध्वानि देव वयुनानि विद्वान्…’’ तक ज्ञान, उपासना, कर्म का रहस्य वर्णित है।
शङ्करानन्द स्वामी
श्री शङ्करानन्द सरस्वतीजी का जन्म दक्षिण दिश मॆं हुआ था । उनका सकलविद्वज्जन श्लाघनीय विद्वत्त्व उनके द्वारा रचित उपनिषद्दीपिका, सूत्रदीपिका नामक ब्रह्म-सूत्रविवृतिः, पुराणरत्न तथा आत्मपुराण से पता चलता है । पञ्चदशी के रचयिता, श्री विद्यारण्य स्वामीजी भी अपने मङ्लाचरण में “नमः श्रीशंकरानन्दगुरुपादाम्बुजन्मने । सविलासमहामोहग्राहग्रासैककर्मणे ॥” यह उल्लिखित करते हैं। यही उनकी विद्यातिशयताको बताने केलिये पर्याप्त है । पर ऐसे सकललोकोपकारक विद्वान् श्रीशंकरानन्दजी का जन्म कब हूआ कहाँ उनका निर्वाण हूआ, उनके जीवनकालमें घटित अन्य घटनाओं के बारे में इतिहास मौन है ।
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