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Sampurna kranti antim karya yojana / सम्पूर्ण क्रान्ति-अन्तिम कार्य योजना

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

श्री लव कुश सिंह ”विश्वमानव“ का यह मानसिक कार्य इस स्थिति तक योग्यता रखता है कि वैश्विक सामाजिक-सांस्कृतिक-साहित्यिक एकीकरण सहित विश्व एकता-शान्ति-स्थिरता-विकास के लिए जो भी कार्य योजना हो उसे देश व संयुक्त राष्ट्र संघ अपने शासकीय कानून के अनुसार आसानी से प्राप्त कर सकता है।
 प्रस्तुत पुस्तक ” सम्पूर्ण क्रान्ति-अन्तिम कार्य योजना“, विश्वशास्त्र के आविष्कारों का व्यावहारिक जीवन (व्यष्टि और समष्टि) में उपयोगिता का सारांश-अंश भाग है। चूँकि प्रस्तुत पुस्तक क्रियात्मक है अर्थात् भारत व विश्व के नेतृत्वकर्ताओं द्वारा व्यक्त विचार का शासनिक प्रणाली के अनुसार स्थापना की प्रक्रिया पर आधारित है इसलिए समाज व राज्य के विभिन्न स्तर के नेतृत्वकर्ताओं जैसे - समाजसेवी, लेखक, विचारक, धर्माचार्य, राजनीतिक नेतागण, विधायक, सांसद, शिक्षण क्षेत्र से जुड़े आचार्य इत्यादि सहित आम नागरिक को इस पुस्तक का अध्ययन अवश्य करना चाहिए जिससे उन्हें अपने आध्यात्मिक एवं दार्शनिक विरासत के सम्बन्ध में आधारभूत दृष्टि प्राप्त हो और ”एक भारत - श्रेष्ठ भारत“ तथा ”नया भारत (New India)“ के विचार को प्राप्त करने के इस अन्तिम मार्ग पर कार्यवाही प्रारम्भ हो सके। 
 सत्य रूप में इस पुस्तक में जो कुछ है उस पर यह कहा जा सकता है – “यही है भारत” और “यह ही है राष्ट्रवाद की मुख्यधारा” और “यह ही है विकास की मुख्यधारा”

    ”विश्वशास्त्र“ के समीक्षक द्वय
    
-डॅा0 कन्हैया लाल, एम.ए., एम.फिल.पीएच.डी (समाजशास्त्र-बी.एच.यू.)
  निवास-घासीपुर बसाढ़ी, अधवार, चुनार, मीरजापुर (उ0 प्र0)-231304, भारत

  -डॅा0 राम व्यास सिंह, एम.ए., पीएच.डी (योग, आई.एम.एस-बी.एच.यू.)
    निवास-कोलना, चुनार, मीरजापुर (उ0 प्र0)-231304, भारत

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Paperback

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Paperback 550

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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