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Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palजब जीवन के हर एक पल को जीने वाली शशि ने पहली बार उस भस्म-मले कपाली को देखा, जो आसमान की ओर शंख उठाए, उसमें अपार शक्ति फूँक रहा था, वह एक पल के लिए थम गई। उसकी यात्रा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संगम घात तक पहुँच चुकी थी। बी.ए. में पढ़ने वाली शशि का इस अघोरी के प्रति आकर्षण शंखनाद था—एक नए धर्म युद्ध का।
यह प्रेम कहानी एक नई दिशा में ले जाने वाली है, जहाँ प्रेम की परिभाषा मिलने और बिछड़ने से परे है। शशि और भैरव की इस यात्रा में आत्मा की गहराइयों में उतरकर उसके सच्चे स्वरूप को उजागर करने का प्रयास किया गया है। दो संसारों का यह मिलन दर्शाता है कि प्रेम एक अनंत यात्रा है, जिसमें खोकर ही खुद को पाया जा सकता है।
वत्स
वत्स, एक युवा और उभरते हुए कवि, लेखक और संपादक हैं, जिनका जन्म और बचपन इलाहाबाद में बीता। उनके लेखन का सफर कविता संग्रह रूह और इंशा से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने जीवन, प्रेम, और संवेदनाओं के विभिन्न पहलुओं को खूबसूरती से अभिव्यक्त किया है।
वत्स का नाम आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां उन्होंने अपनी कविताओं और विचारों के माध्यम से व्यापक पाठक वर्ग को आकर्षित किया है। उनकी काव्य रचनाएँ न केवल भावनात्मक गहराई लिए हुए हैं, बल्कि समाज के ज्वलंत मुद्दों पर भी प्रकाश डालती हैं। उनका लेखन न केवल साहित्यिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि वे फिल्म, वेब सीरीज और टेलीविजन के क्षेत्र में भी अपनी संपादन कला के लिए जाने जाते हैं।
उनकी यह पहली उपन्यास एक नए प्रेम की परिभाषा प्रस्तुत करती है, जो पारंपरिक संबंधों से परे जाकर जीवन के जटिलताओं को उजागर करती है। वत्स की लेखनी में गहराई, संवेदनशीलता, और एक नई सोच की झलक मिलती है, जो पाठकों को एक नई यात्रा पर ले जाती है।
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