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Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palमेरी मर्मस्पर्शी वेदनाओं पर आधारित ये किताब, मेरे जीवन के पहलुओं को उजागर करती है। शायरी में कहे लफ्ज़ों में हालातों का बखान है। अक्सर प्रेम विफल परिस्थितियों में संदेहस्पदक स्थिति में रहने लगता है। उसको अपनी जगह चाहिए। वह जगह जो बरसों पहले उन्हीं रास्तों पर छोड़ आया था, जहां पहली बार प्रेम से उसकी मुलाकात हुई। अलगाव की स्थिति, विवशता बता, दूसरी राह निकल पड़ती है। परंतु जब वही प्रेम बरसों बाद आपके समक्ष खड़ा हो जाए, तब वह शिकायतों का अंबार उड़ेल देता है। वह वास्तविक सत्य को जानना चाहता है कि आखिर प्रेम हुआ क्यों? हुआ तो रुका क्यों नहीं? जब चला गया, तो फिर से ये वापिसी कैसी। "ताल्लुकात" बिगड़े, संभले या संवरें, यह इस किताब के लफ्ज़ों में पूर्णतः जागृत है
पूजा गौतम
इनका नाम पूजा गौतम है। यह दिल्ली की रहने वाली हैं। इन्होंने इतिहास में स्नातकोत्तर और बी.एड किया है और साथ ही हिंदी में स्नातकोत्तर भी किया हैं। "Melancholic" जो इनकी खुद की लिखी पुस्तक है, उसमें इन्होंने कविताओं और लेख के माध्यम से खुद का उदास व्यक्तित्व निखारा है। इनका मानना है की ज्ञान अर्जित करना कभी रुकना नही चाहिए बल्कि ये प्रवाह्यमान और निरंतर गति से बढ़ते रहना चाहिए। यह औरतों की जागरूकता के विषय में लिखना ज़्यादा पसंद करती हैं, या यूं कहिए ज्वलंत मुद्दों को उठाकर अपनी लेखनी द्वारा प्रश्नवाचक चिन्ह लगा देती हैं कि अन्याय और अत्याचारों का समाधान आखिर हैं कहां? इनको कविताएं, शायरी, ग़ज़ल, निबंध और लेख लिखने का शौक है और इन्होंने इसी क्षेत्र में कई प्रशस्ति पत्र भी हासिल किए हैं। लिखना इनकी रुचि में निहित है। शब्दों द्वारा भावों का लिखित रूप में प्रदर्शन कर इन्हें अत्यधिक पसंद है। लेखन के क्षेत्र में यह चरमोत्कर्ष पर पहुंचना चाहती हैं। यह 15+ पुस्तकें संकलित कर चुकी हैं। "तारें ज़मीन" पत्रिका में इन्होंने वैश्यावृति के ऊपर "नर-नगण्यता" नामक एक कविता लिखी, जिसके लिए इन्हें "स्टार ऑफ द मैगज़ीन" से सम्मानित भी किया गया। "द ओपस कोलिसियम" की तरफ से "बेस्ट राइटर अवॉर्ड" और पब्लिशिंग एक्सपर्ट की तरफ से "स्टैंडिंग ओवेशन अवार्ड" भी जीत चुकी हैं। यह भावनात्मक तौर से हर चीज़ को बहुत गहराई से देखती हैं और उसका मूल्यांकन करती हैं। इनका मानना है कि लेखन हमारे व्यक्तिगत जीवन से ही जुड़ा होता है और हम जो महसूस करते हैं वही हम लिखते हैं। आधार हमारी आसपास की वस्तुएं और भावनाएं ही हैं।
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