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Tumhari Kahani / तुम्हारी कहानी (नारी जीवन की 100 साल की यात्रा) (Naari Jeevan Ki 100 Saal Ki Yatra)

Author Name: Ismita Mathur | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

“उस दिन पहली बार, मैंने नीरज को ध्यान से देखा था। वह मुझे मुग्ध दृष्टि से देख रहा था। गुलाबी साड़ी में लिपटी मैं, बीरबहूटी हो गयी थी। न जाने ये कैसा सम्मोहन, कैसा इन्द्रजाल मेरे चारों और बुनता जा रहा था। मैं भूल गयी थी कि मैं नीरज से पाँच वर्ष बड़ी और बहुत अधिक क्वॉलिफाइड हूँ……।

……आम के पत्तों और गेंदों के फूलों से सजे मंडप में जब पंडित जी ने मेरा कोमल हाथ नीरज के दृढ़निश्चयी हाथों में दिया, तो मेरा अंग-अंग रोमांचित हो उठा। मैं भूल गयी, कि मेरा विवाह कितनी कठिनाई से हो रहा है। और कैसे चुपके, चुपके……।”

*******

बासंती मौसम, फूलों की बहार और उससे भी सुन्दर सजना। पँखुरी दिवा स्वप्नों में डोलती रहती। तभी एक वज्रपात हुआ। जैसे क़ुदरत ने उनके साथ बहुत बड़ा मज़ाक किया था.....।

......पँखुरी फ़फ़क पड़ी। इतने दिनों का दबा हुआ लावा जैसे बह निकला,

“नहीं चाचीजी! सात फेरों के बंधन में नहीं बंधे तो क्या हुआ। मन से मन का बंधन तो है ना। मैं उनको नहीं भुला सकती......।

*******

“तुम्हारी कहानी” लगभग एक शताब्दी के नारी-जीवन की यात्रा को दर्शाती हैं, जिसमें नानी, दादी के ज़माने से लेकर इक्कीसवीं सदी के आधुनिक युग तक की लड़कियाँ भी मिलेगी। लगभग तीन पीढ़ियों की कहानियाँ।

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इस्मिता माथुर

इस्मिता माथुर ‘‘मुस्कान’’ का जन्म 21 फरवरी 1962 को मेरठ (उत्तर प्रदेश) में  हुआ था। विवाहोपरांत आपने लगभग अट्ठाईस वर्ष तक मध्य प्रदेश राज्य विद्युत मंडल/ पॉवर ट्राँसमिशन कम्पनी में संचार अभियंता के बतौर शासकीय सेवा की और वर्ष 2016 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्राप्त की।

आप लगभग दस वर्ष तक कंपनी की ‘‘महिला शिकायत समिति’’ की सक्रिय सदस्य भी रहीं, जिसने आपको महिलाओं की समस्याओं से बहुत गहरे तक जोड़ दिया।

बचपन से ही आपका झुकाव साहित्य, संगीत, नृत्य, एवं पेंटिग की ओर रहा है। संवेदनशील ह्रदय की लेखिका ने जबलपुर के प्राकृतिक सौन्दर्य, घर-परिवार और कार्यालय की विभिन्न खट्ठी-मीठी यादों और लम्बी यात्राओं से मिले अनुभवों को विभिन्न कहानियों, लघु कथाओं और कविताओं के रूप लेखनीबद्ध किया है।

समय-समय पर इनकी लघु कथाएँ और अनुभव विभिन्न पत्र पत्रिकाओं यथा ‘सरिता’ ‘वनिता’ एवं ‘मधुरिमा-दैनिक भास्कर' में प्रकाशित और आकाशवाणी जबलपुर से प्रसारित होते रहे हैं। इनकी सभी कहानियाँ आम बोलचाल की भाषा में है।

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