আভোক
By Arunav Hazarika in Mystery | वाचलं गेलेलं: 1,674 | लाइक: 2
আভোক     “...... এওঁৰ বন্ধুসকল আহিল খবৰ নিদিয়াকৈ ; খাই হেনো‌ গাজৰৰ হালুৱা । সুখৰ কথা যে হকিন্স কন্টিউৰা আছে ; ইয়া  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 2,2020 08:19 PM
भारत की आवाज़
By Dr. Sonal Shukla in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,667 | लाइक: 0
वो जो कहते हैं की नहीं हो सकता तुमसे,अब दिखाने का मौका आया है,ऐ भारत, दिखा दो उन्हें की,न सिखाएं हमें जो हमीं से पाया ह  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 7,2020 09:04 PM
निर्भया
By Nilesh Sankrityayan in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,665 | लाइक: 0
       निर्भया के पिता आपसे कुछ कहना चाहते हैं। पूजा मैंने कई देवताओं को,धन-धान्य का दान किया तब जाकर देवी के रू  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 12,2020 02:43 PM
The Blue Umbrella Summary
By Pranav Agarwal in Mystery | वाचलं गेलेलं: 1,664 | लाइक: 0
Young Biniya lives a poor lifestyle in a small village in the mountainous and snowy region of Himachal Pradesh in India along with her widowed mom and wrestler brother. She entertains various tourists, and while doing so with some tourists from Japan, trades in her bear-tooth amulet with a blue umbr  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 11,2020 02:29 PM
The fertility treatment
By Filter Koffee Chronicles in Humour & Comedy | वाचलं गेलेलं: 1,658 | लाइक: 11
Muthu and his father in law, Varadhan were waiting anxiously outside the doctor’s room.  They both had been waiting for over 2 hours now. The doctor, they could see was extremely busy, dealing with a wide spectrum of cases and complaints. Many people, just like them, were only there to ha  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 4,2020 02:37 AM
रोकना तो रोक ले मुझको
By Amit kumar in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,658 | लाइक: 4
रोकना तो रोक ले मुझको, तू खुद ही हार कर जाएगा, मरते वक़्त भी मेरे मुख पे, तू हँसता चेहरा पाएगा।।   सितम जो ढाले हो मुझ प  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 16,2020 02:06 PM
Eye or I
By Priya N Rao in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,643 | लाइक: 41
EYE OR I? Because only eye can see the world... Because only I can see you... Only eye can see the flower which blooms in the night And only I can see your dreams which glow overnight Only eye can see how the water flows to its destination And only I can see how your thought flows out from your mind  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Mar 24,2020 05:15 PM
Meera Mohan
By Shailesh Dayama in True Story | वाचलं गेलेलं: 1,641 | लाइक: 0
दौड़। .. ज़िन्दगी का एक ऐसा सच जो आपही के साथ दौड़ता  रहता है कहते है जो हमारा नहीं वो हमे लाख जतन करके भी नहीं मिलता और   आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Mar 25,2020 05:44 PM
ठहराव
By Manpreet Sarla in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,641 | लाइक: 0
ठहरे हुए पानी में जैसे थोड़ा बहाव ज़रूरी था, भागती दौड़ती इस ज़िदगी में थोड़ा ठहराव ज़रूरी था, ज़रूरी था कि हम अपने अंतर्मन   आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 19,2020 04:57 PM
हाल चाल
By Mayank Manohar in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,639 | लाइक: 0
On one of these days of quarantine, a bird came to my window and was peeping inside my house. I felt she was trying to tell me and all human beings something very important. I wrote a poem titled हाल चाल to convey her feelings: हाल चाल: पूछने आयी हूँ त  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 4,2020 11:16 PM
எது கவிதை?
By Sobika Sekar in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,638 | लाइक: 0
எது கவிதை? சாணம் மொழுகிய வாசலில் அம்மாவின் எட்டுப் புள்ளிக் கோலமும்; சிறு வயதில் அடுப்புக்கரிக் கொண்டு வரைந்த   आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 18,2020 06:31 PM
ख़्वाब
By Shreya Lath in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,635 | लाइक: 0
सुना है मैंने वो सजाती थी सपने और करता था वो पूरे, मेरी कल्पना की दुनिया के क्या वो राजकुमार बनोगे तुम? मेरे सपने कुछ   आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख May 22,2020 01:04 AM
दूरियॉ मिटाते हैं ।
By Ajahar Rahaman in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,633 | लाइक: 0
चल दूरियॉ मिटाते हैं । गुस्ताखियॉ भुलाते हैं । कोई गीत नया गाते हैं । आ तू- आ तू फिर से , सनम मुस्कराते हैं । चल माही फि  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 12,2020 12:00 PM
On Palm Sunday 2020 सोचा न था
By Seema Benedict in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,628 | लाइक: 4
किसने सोचा था कि पुण्य सप्ताह की शरुआत घर बैठे होगी।मनुष्य के घर बैठते ही वायु शुद्ध हो गई।आसमान साफ दिखने लगा,मछल  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Apr 15,2020 11:54 AM
कटी पतंग
By MR VIVEK KUMAR PANDEY in Poetry | वाचलं गेलेलं: 1,622 | लाइक: 1
"जंग के मैदान में तु हिम्मत मत हारना,  कटी पतंग की तरह तु कट मत जाना,  पंखों को फैला के उड़ना है तुझे बस ,  तु हिम्मत  आणखी वाचा...
प्रकाशनाची तारीख Mar 23,2020 08:17 AM