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Dange ki Chhanv Mein / दंगे की छाँव में

Author Name: Amrit | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

दंगों के असर का पैमाना महज़ क़त्ल, बलात्कार या जान माल की हानि नहीं हो सकता। दंगे की जड़ें किस तरह समाज की मिट्टी में धँस कर उसकी उर्वरता सोख लेती हैं, इस विस्तृत प्रभाव को दर्शाती है ''दंगे की छाँव में''। बात 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गि रा दि ये जाने से शुरू होती है। नौबतपुर में क्रिकेट खेलने वाले बच्चे परेशान हैं क्योंकि दंगों की वजह से क्रिके ट बंद हो चुका है। उनकी क्रिकेट की जद्दोज़हद से शुरू हुई कहानी, इंजीनियरिंग के स्टूडेंट से होते हुए, एक हवलदार, एक गुंडा, एक किसान, भोंपू मास्टर, एक स्ट्रगलिंग एक्टर जैसे कई चरित्रों को छूती हुई दंगों के अंत तक पहुंचती है। सच्चाई का ज़हर गले में थाम नीलकंठ बना पगला बाबू एक धागे की तरह इन मोतियों को पिरोता है। दंगे की छाँव में झुलस रहे ये आम लोग कैसे इसमें फँसते हैं, उलझते हैं और फिर इससे बाहर निकलते हैं, इसी उठा पटक को ज़िंदा करती है ''दंगे की छाँव में''।एक भीनी मुस्कान के साथ अंदर तक झकझोरती ये कहानी समाज के उस अनछुए पहलू की है जि सपर कभी कि सी ने ध्यान ही नहीं दिया। ये कहानी उन लोगो की है जो हर गली, हर मोहल्ले, हर शहर में होते हैं पर किसी को दिखाई नहीं देते, गोया पीठ का तिल हो।

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अमृत

गहरी बातें बिल्कुल आसानी से कह जाने में पारंगत अमृत की ये चौथी किताब है। अमृत ने किताबों के अलावा कई वेब सीरीज, शार्ट फिल्म्स और फिल्मों के लिए पटकथाएँ भी लिखीं हैं। आम जन जीवन से उठाए चरित्रों को मोड़ लेती कहानियों के अंदर स्थापित कर बड़ी सहजता के साथ ये आपको समाज की ज्वलंत समस्याओं से रूबरू करा जाते हैं। लेखन के साथ साथ अमृत निर्देशन और एक्टिंग में भी सक्रिय हैं। उनकी फिल्म ‘परिचय’ अभी तक 23 अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म फे स्टिवल्स का हि स्सा बन चुकी है।  

Phone:8451943444  

Email: amrit.961@gmail.com  

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