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Dvadash jyotirlianga aur 13van antim jyotirlianga / द्वादश ज्योतिर्लिंग और 13वां अन्तिम ज्योतिर्लिंग

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

विषय- सूची

भाग-1 : वंश एवं गोत्र
मानव सभ्यता का विकास और जाति की उत्पत्ति
अ. पौराणिक वंश  
ब. ऐतिहासिक वंश 
स. भविष्य के वंश
गोत्र
मनवन्तर


भाग-2 : काल, युग बोध एवं अवतार
सार्वभौम सत्य-सिद्धान्त के अनुसार काल, युग बोध एवं अवतार

भाग-3 : शिव और ज्योतिर्लिंग
शिव
ज्योतिर्लिंग : अर्थ 
योगेश्वर (ज्ञान का विश्वरूप) और भोगेश्वर (कर्मज्ञान का विश्वरूप)

भाग-4 : द्वादश ज्योतिर्लिंग (अदृश्य काल)
01. सोमनाथ 
02. मल्लिकार्जुन 
03. महाकालेश्वर 
04. ओमकारेश्वर 
05. केदारनाथ
06. श्रीभीमशंकर 
07. श्रीकाशी विश्वनाथ 
08. श्रीत्रयम्बकेश्वर 
09. श्रीवैद्यनाथ 
10. श्रीनागेश्वर
11. श्रीरामेश्वर
12. श्रीघुश्मेश्वर

भाग-5 : काशी
काशी
मोक्षदायिनी काशी और जीवनदायिनी सत्यकाशी : अर्थ व प्रतीक चिन्ह

भाग-6 : 13वां और अन्तिम ज्योतिर्लिंग (दृश्य काल)
13वां और अन्तिम भोगेश्वरनाथ
“सम्पूर्ण मानक” का विकास भारतीय आध्यात्म-दर्शन का मूल और अन्तिम लक्ष्य

भाग-7 : 2020 - मन का नवीनीकरण
प्रारम्भ के पहले दिव्य-दृष्टि
मिले सुर मेरा तुम्हारा, तो सुर बने हमारा
नये समाज के निर्माण का आधार
सन् 2020 ई0 - मन का नवीनीकरण
ईश्वरीय समाज
ईश्वरीय समाज निर्माण की कार्यवाही आधारित पुस्तकें
विश्व-नागरिक धर्म का धर्मयुक्त धर्मशास्त्र - कर्मवेद: प्रथम, अन्तिम तथा पंचम वेदीय श्रृंखला
विश्व-राज्य धर्म का धर्मनिरपेक्ष धर्मशास्त्र - विश्वमानक शून्य-मन की गुणवत्ता का विश्वमानक (WS-0) श्रृंखला
“सत्यकाशी महायोजना” (वाराणसी-विन्ध्याचल-शिवद्वार-सोनभद्र के बीच का क्षेत्र)
विश्व का मूल मन्त्र-“जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान-जय ज्ञान-जय कर्मज्ञान”
एक विश्व - श्रेष्ठ विश्व के निर्माण के लिए आवश्यक कार्य

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Paperback

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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