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Vishvamānava-vartamān netṛutvakartāoan kā spaṣhṭikaraṇ / विश्वमानव-वर्तमान नेतृत्वकर्ताओं का स्पष्टिकरण

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

विषय- सूची

भाग-1 : भारत के स्वतन्त्रता (सन् 1947 ई0) के पूर्व जन्में नेतृत्वकर्ता

01. स्वामी स्वरूपानन्द (2 सितम्बर, 1924 - )
02. श्री अटल बिहारी वाजपेयी ( 25 दिसम्बर, 1926 - )   
03. श्री लाल कृष्ण आडवाणी (8 नवम्बर, 1927 - )
04. डा0 कर्ण सिंह (9 मार्च, 1931 - )
05. श्री वी.एस.नायपाल (17 अगस्त, 1932 - )
06. श्री मुरली मनोहर जोशी (5 जनवरी, 1934 - )
07. श्री केशरी नाथ त्रिपाठी (10 नवम्बर, 1934 - )
08. श्री हामिद अंसारी (1 अप्रैल, 1934 - )
09. श्रीमती प्रतिभा पाटिल (19 दिसम्बर, 1934 - )
10. श्री राम नाइक (16 अप्रैल 1934 - )
11. दलाई लामा (6 जुलाई, 1935 - )
12. स्वामी जयेन्द्र सरस्वती (18 जुलाई, 1935 - )
13. श्री प्रणव मुखर्जी (11 दिसम्बर 1935 - )
14. श्री बी.एल.जोशी (27 मार्च, 1936 - )
15. श्री गिरधर मालवीय (14 नवम्बर 1936 - )
16. श्री कौफी अन्नान (8 अप्रैल, 1938 - )
17. श्रीमती शीला दीक्षित (31 मार्च, 1938 - )
18. श्री अन्ना हजारे (15 जनवरी, 1940 - )
19. श्री सैम पित्रोदा (4 मई 1942 - )
20. श्री यदुनाथ सिंह (6 जुलाई, 1945 - )
21. श्रीमती सोनिया गाँधी (9 दिसम्बर 1946 - )
22. श्री बिल क्लिन्टन (19 अगस्त, 1946 - )

भाग-2 : भारत के स्वतन्त्रता (सन् 1947 ई0) के बाद जन्में नेतृत्वकर्ता

01. भारतीय संविधान
02. भारतीय संसद
03. भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
04. भारतीय शिक्षा प्रणाली
05. भारतीय विपणन प्रणाली
06. भारतीय मीडिया (चौथा स्तम्भ - पत्रकारिता)
07. सहस्त्राब्दि विश्व शान्ति सम्मेलन
08. श्री फर्दिनो इनासियो रिबेलो (31 जुलाई 1949 - )
09. श्री नरेन्द्र मोदी (17 सितम्बर 1950 - )
10. श्री राज नाथ सिंह 
11. श्री बराक ओबामा 
12. बाबा रामदेव 
13. अमर उजाला फाउण्डेशन प्रस्तुति “संवाद”

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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