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Jaativihin Bharat / जातिविहीन भारत Ek Vaastavikta / एक वास्तविकता

Author Name: Wazir Singh Poonia | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

जातिविहीन भारत एक ऐसा विचार है जिसका सपना हमारे संविधान निर्माताओं ने देखा था। ऐसा लग सकता है कि एक सपना जितना दूर है, भारत को सामाजिक, आर्थिक और राजनीकि जीवन में जाति को एक अप्रासंगिक विभाजक बनाने की आवश्यकता को कम नहीं किया जा सकता है। राष्ट्रिय स्तर पर और राज्यों में क्रमिक सरकारों द्वारा शुरू किए गए कई सुधारों के बावजूद, समग्र प्रयास आधे-अधुरे, बिना पतवार के और अक्सर एक दूसरे के साथ विरोधाभासी उद्देश्यों पर काम करते प्रतीत होते हैं।

यह पुस्तक जाति व्यवस्था के आधार को खोजने, उसके मूल से उसका पता लगाने और उसके विभिन्न पहलुओं को विश्लेषण करने का एक प्रयास है ताकि समाज से इस सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए एक व्यवहारिक दृष्टिकोण निकाला जा सके। पुस्तक का उद्देश्य एक व्यापक सर्वसम्मति के आधार पर व्यवहारिक समाधान देना है जो वास्तव में समतावादी समाज के निर्माण के लिए सभी वर्गों के लिए अनुकूल रूप से स्वीकार्य हो सकता है।

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वज़ीर सिंह पूनिया

एक इन्जीनियर से वकील बने वजीर सिंह पूनिया का जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक अनुभव है। उन्होंने वस्त्र तकनीकी संस्थान टी.आई.टी. भिवानी से 1980 में टैक्सटाईट ईन्जीनियरिंग में डिग्री प्राप्त की। एक इन्जीनियर के रूप में सफल करियर बनाने के बाद उन्होंने अन्नामलाई विश्वविद्यालय से बिजनैस मैनेजमेन्ट (व्यवसाय प्रबन्धन) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा करने के बाद कपड़ा व्यवसाय में कदम रखा। उस समय के सामाजिक राजनीतिक विकास में उनकी हमेशा गहरी रूची रही थी जिसने उन्हें देश के कानून को सिखने के लिए प्रेरित किया। उत्कृष्ठता की खोज में उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नतकोत्तर किया। वह वर्तमान में जिला अदालत हिसार में अधिवक्ता है।

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