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Prem avataran / प्रेम अवतरण दैविकता का उदय / daivikata ka uday

Author Name: Mitr Sut | Format: Paperback | Genre : Religion & Spirituality | Other Details

मैत्रेय दादाश्रीजी की शिक्षाओं और अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक आपको आध्यात्मिकता की नई दुनिया में ले जायेगा | यह आपके लिए मददगार होगा -

·         सारे संशयों को दूर करने में  

·         अगर आप कहीं अटक गए हैं तब यह आपकी उन्नति में सहायक होगा और  

·         इससे आपको ज्ञान के परे वास्तविक अनुभव का लाभ मिलेगा 

मैत्रेय दादाश्रीजी पर इस पुस्तक को लिख कर मित्र सुत ने मानवता की भलाई के लिए एक महान कार्य किया है | इसको पढ़ने मात्र से व्यक्ति को शांति और दैविक प्रेम का अनुभव होता है | मानव मन को उलझाने वाले लगभग सभी सवालों का जवाब उन्होंने बेहद ही सरल और स्पष्ट रूप से दिया है | परम गुरु या दैविकता की उपस्थिति को जानने के लिए और उनके चरणों में समर्पित होने के लिए भी दैवीय बुद्धि का होना अनिवार्य है | जिस स्पष्टता से मित्र सुत ने जीवन की सच्चाई का विश्लेषण किया है और इसे पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है, वह काबिलेतारीफ है | जो जीवन की जटिलताओं से बाहर आना चाहते हैं, उनके लिए यह पुस्तक पठनीय है | 

-शिवी वर्मा-‘लाइफ पॉजिटिव’ पत्रिका की संपादक

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मित्र सुत

मित्र सुत एक अनुगृहित नाम है, यह नाम दैविक मित्र दादाश्रीजी के द्वारा प्रदत्त है | पेशे से वह एक डॉक्टर हैं और मुंबई के एक प्रसिद्ध हॉस्पिटल में कार्यरत हैं | साथ ही वो मैत्रीबोध परिवार के मिशन के कार्यों में संलग्नित हैं | उनके अन्दर “जीवन के सत्यों” को जानने की बचपन से तीव्र इच्छा थी, जिसकी वजह से उन्होंने ग्रंथों का अध्ययन बालपन में ही प्रारंभ कर दिया था | तेरह सालों तक उन्होंने वेदांत की शिक्षा ग्रहण की  और इस दौरान उन्हें कई गुरु और मार्गदर्शक मिलें जिनसे उन्हें बहुत कुछ सीखने का मौका मिला | श्रीमती जया राव के मार्गदर्शन में मुख्यतः ज्ञानयोग पर वह केन्द्रित रहें | उनकी आध्यात्मिक खोज तब तक चलती रही जब तक वह दादाश्रीजी से जनवरी, 2013 में मिलें | उनके जीवन का वह एक बड़ा पड़ाव था, जिसके बाद उनका जीवन हमेशा के लिए बदल गया |

उनके जीवन की पूर्व अर्जित शिक्षा और अनुभवों ने उन्हें आध्यात्मिक, व्यक्तिगत और प्रोफेशनल जीवन में आगे बढ़ने में मदद की | दादाश्रीजी के प्रति उनकी भक्ति और समर्पण ने उन्हें मैत्रीबोध परिवार के साथ प्रेम, 

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