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Surkh Laal Barf / सुर्ख लाल बर्फ़ बदलते पहलू और बिखरते रंग / Badalte Pehlu Aur Bikharte Rang

Author Name: Asha Singh Gaur | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

“कविताओं का यह संकलन पिछले कुछ वर्षों में मेरी भावनात्मक यात्रा का एक अभिन्न अंग रहा है। इन्हें पढ़ना यादों की गलियों में टहलने की तरह है जो हर बार मेरे चेहरे पर एक मासूम मुस्कान छोड़ जाती हैं। ये कविताएँ उस दर्पण की तरह हैं जिसमें मैं अपने सच्चे स्वरूप को देख पाती हूँ।“ - आशा सिंह गौर

“आशा की कविताएं भाषा में जितनी सरल होती हैं विचारों में उतनी ही प्रभावशाली हैं। ये न केवल समाज के बंद दिमागों को खोलती हैं, बल्कि उन्हें जगाती भी हैं। ये कविताएं नहीं, सच लिखती हैं।“ - प्रतीक मिश्रा, कवि

“मरु में उगे हरे बिरवे सी कविताएं हैं आशा सिंह गौर की।“ - संतोष श्रीवास्तव, साहित्यकार

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Paperback
Paperback 299

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आशा सिंह गौर

आशा सिंह गौर, मुंबई की एक कंटेंट राइटर हैं। कविताओं के प्रति शुरू से ही उनका गहरा खिंचाव रहा और जल्द ही वे खुद को शब्दों के माध्यम से व्यक्त करने लगीं।

उनकी कविताओं में एक अलग अभिव्यक्ति है। उनकी कविताएँ उनके परिवेश, आस-पास के लोगों, प्रकृति और महत्वपूर्ण घटनाओं से प्रेरित हैं। वह खुद को एक विशेष विषय में सीमित नहीं करतीं और विभिन्न विषयों पर लिखना पसंद करती हैं जिसमें प्रेम, देशभक्ति, नारीवाद, जीवन, परिवार, और बहुत से विषय शामिल हैं।

उनकी कुछ कविताओं को विभिन्न स्तरों पर सराहा और सम्मानित किया जा चूका है। उनका मानना ​​है कि कविताएँ साझा की जाना चाहिए। कविताएँ किसीको प्रेरणा दे सकती हैं और किसी के अकेलेपन की मूक साथी होती हैं। कविताएँ जन साधारण को एक जुट करने कि क्षमता रखती हैं।

यह पुस्तक कवयित्री द्वारा लिखी गई लगभग पचास अनूठी कविताओं का संकलन है। इस संकलन की पांडुलिपि को एक युवा हिंदी कवि द्वारा कविताओं के सर्वश्रेष्ठ संकलन के लिए 2015 में सम्मानित किया गया था। अंततः इस पुस्तक के साथ वो अपनी दिल को छू जाने वाली कविताओं को पाठकों तक ले जाने का साहस कर रही हैं।

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