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प्रेमद
प्रेमद
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Book Description

"प्रेमद" एक सफ़र है प्रेम का, जो अपने भीतर समेटे हुए है, उन सभी भावों को जो मैंने अपनी प्रियतमा के साथ बिताए हुए क्षणों में महसूस किया। इसमें जिक्र है उनके आने के बाद मुझमें आए बदलावो का,पहली मुलाक़ात के बाद उनसे वापस ना मिल पाने का डर है,मेरे द्वारा उनके समक्ष स्वीकार करना कि जीवन में कोई थी उनके पहले, उनका निडर स्वभाव जब वह हमारे प्रेम को अपने पिता के समक्ष स्वीकार करती है, मेरा उन्हें खो देने का भय और कुछ ना कर पाने की हताशा भी है इन कविताओं में, उनके चाय के प्रति अनोखे से प्रेम का जिक्र और हम दोनों का संघर्ष एक-दूसरे के साथ रहने के लिए और फ़िर विरह का समावेश भी है इन कविताओं में ज़ब वह  एक दिन बस यूंही चली जाती है, उनके जाने के बाद की पीड़ा, तकलीफ़ जो असहनीय रही फिर भी अंततः एक आशा की टिमटिमाती ज्योति भी मन में की लौट आएगी वह किसी दिन सब बंदिशों को तोड़कर और कर देगी मुझे मुक्त अपनी विरह की असहनीय पीड़ा से । इन कविताओं में लिखे शब्द काल्पनिक अवश्य है,पर जो मनोभाव है उसे मैंने हर क्षण जिया है उनके प्रेम में और वही यहां लिखा है इन कविताओं में ।